मजेदार कहानी

                          बर्फ कि चादर



एक गांव में हरि नाम का एक आदमी रहा करता था वह चादरों का धंधा करता था ठंड के मौसम में तो उसकी अच्छी खासी चादर बिक जाती थी ।लेकिन गर्मी का मौसम आते हैं उसका धंधा मंदा पड़ जाता था एक दिन वह घर में अपनी बेटी से कहता है।

बेटी गर्मी का मौसम आ गया है अब तो हमारी चादर नहीं बिकेगी मैं रोज आता हूं और ज्यादा में बेचने की कोशिश करता हूं लेकिन मुझसे कोई भी ज्यादा रह नहीं खरीदता क्योंकि गर्मी में कौन चादर उड़ता है यह सुनकर उसके बेटी कहती है।

पिता जी अगर आप की चादरें नही बिक रही है तो फिर आप चादर बेचने मत जाइए घर पर ही रहेगी मेरे साथ यह सुनकर अरे अपनी बेटी से कहता है बेटी अगर मैं घर पर रहने लगूंगा तो फिर हमारे घर पर खाना कैसे आएगा यह कह कर हरि बाहर निकलता है।


बाहर निकलते ही उसे एक आदमी दिखाई देता है जो उसका दोस्त होता है वह कहता है कि कितनी धूप है गर्मी से तो हाल बुरा हाल हो रहा है उसने में एक उनके गांव की महिला ती है और वह कहती है कि हमारे गांव में तो पूरा पानी खत्म हो गया है सुबह से मुझे एक मटकी भी पानी नहीं मिला।

अगर ऐसा ही चलता रहा तो धीरे-धीरे हमारे गांव से पूरा पानी खत्म हो जाएगा और हमारे गांव में लोग प्यासे रह जाएंगे हरी करता है हां हमारे गांव के जानवरों को भी पानी नहीं मिल रहा है।

इतने में हरी की बेटी आती है और कहती है पिताजी हमारे घर में थोड़ा पानी बचा है चलो हम उन जानवरों को फैला कर आते हैं हरि और उसके बेटे थोड़ा पानी बचा हुआ घर का लेते हैं और जानवरों को पिलाते हैं।

1 दिन हरी बाजार से अपने घर लौट रहा था तो उसने देखा उसके गांव का सरपंच ठंडे पानी की बोतल ले बेच रहा था यह देखकर हरि बहुत खुश हो गया और सरपंच के पास गया और कहा सरपंच जी आप इतना ठंडा ठंडा पानी पी रहे हैं यह तो आप बहुत ही पुण्य का काम कर रहे हैं लेकिन आप इतना ठंडा पानी कहां से ला रहे हैं।

सरपंच ने हरि से बड़ी गुस्से में कहा तुम आम खाओ ना गुड लिया क्यों गिन रहे हो तुम्हें पानी चाहिए तो लो वरना जाओ यह सुनकर हरी रहता है ठीक है मुझे दो पानी की बोतल दे दीजिए और हरी दो पानी के बोतल लेकर अपने घर जाता है।



घर जाकर हरि का परिवार ठंडा ठंडा पानी पीता है इतने में उसके गांव की एक महिला उसके घर आती है और कहती है कि वह वह पूरा परिवार ठंडा ठंडा पानी पी रहे हैं क्या मुझे भी थोड़ा पानी मिलेगा यह सुनकर हरी कहता है हां लो ना ठंडा पानी।


उस गांव की महिला कहती है कि पता नहीं सरपंच जी के पास इतना ठंडा पानी कहां से आ रहा है और इतने लालची है कि गांव वालों को सरपंच होने के नाते सस्ते में पानी नहीं बल्कि महीने में पानी दे रहे हैं यह सुनकर हरी कहेत है हां यह तो गलत बात है।

हरि कहता है कि सरपंच जी का धंधा अच्छा बढ़ गया है शायद उन्हें कोई आदमी की जरूरत हो इसीलिए मैं वह काम मांगने जा रहा हूं शायद मुझे कोई काम मिल जाए और यह कहकर वह सरपंच जी के घर जाता है लेकिन सरपंच और उसकी बीवी कुछ बात कर रही होती है हरी उनकी बातें चुपके से सुनता है।




सरपंच कहता है कि हमें उस बकरी को गुफा से नहीं निकलना चाहिए नहीं तो हमारा पानी का धंधा पूरा खत्म हो जाएगा यह बातें हरी बाहर से चुपके चुपके सुन रहा होता है यह सुनते ही वह सोचता है कि यह गुफा और बकरी का क्या चक्कर है और यह पता लगाने के लिए वह सरपंच का पीछा करने लगता है।

सरपंच खेत के रास्ते से नदी को पार कर कर एक गुफा में जाता है और गुफा में एक बकरी होती है जो ठंड की वजह से कांप रही होती है लेकिन वह गुफा बर्फ के होती है यह देखकर हरि चौक जाता है और सरपंच कोई बकरी से कहता है कि मैं तुम्हें इस बर्फ की गुफा से नहीं निकाल लूंगा वरना यह बर्फ की गुफा मिट्टी के गुफा बन जाएंगी

यह सुनकर हरि वहां पहुंच जाता है और कहता है सरपंच जी मैं तुम्हें ऐसा नहीं करने दूंगा इस बेजुबान जानवर के ऊपर इतना जुल्म नहीं करने दूंगा तुम इतने दिन से इसे स्थान गुफा में रख रहे हो कहीं यह मर गई तो पर यह कहकर वह सरपंच को धक्का मारता है और बकरी को बाहर ले कर आता है बकरी जैसे ही बाहर आती है वह बर्फ की गुफा मिट्टी की गुफा बन जाती है।

बकरी हरि का धन्यवाद अदा करती है और हरी से कहती है कि मैं तुम्हारा नाम जानती हूं और मैं यह भी जानती हूं कि तुम्हारी इच्छा दरें नहीं बिक रही है हरी चौक जाता है और कहता है कि तुम मेरा नाम कैसे जानती हो और तुम तो बोल सकती हो यह सुनकर बकरी कहती है मैं एक मायावी बकरी हूं और तुमने मेरी जान बचाई है इसलिए मुझे तुम जंगल में छोड़ दो और मैं तुम्हें एक आशीर्वाद दूंगी।


हरि कहेता है कैसा आशीर्वाद बकरी कहती है मेरे पैर के नीचे जो मिट्टी है उसे लोग और अपनी चादरों पर जाकर छिड़क दो और जैसे ही तुम यह मिट्टी उन छात्रों पर छोड़ दूंगी वह चादरे बर्फ के बन जाएंगे और जब तक गर्मी का मौसम है तब तक वह चादरे भर आपकी ही रहेंगे यह सुनकर हरी बहुत कुछ हो जाता है।

वह सच में वह मिट्टी लेता है और अपने घर जाकर उन जानवरों पर अच्छा लगता है और अचानक वह चादरे बर्फ के बन जाती है यह देखकर हरे बहुत कुछ हो जाता है और ठेले पर चादर है बेचैन लगता है ले लो बर्फ की चादर रे लेलो बर्फ की चादर रे ले लो।

धीरे-धीरे कर कर उसके यहां भीड़ उमड़ आती है और सभी बर्फ की चादर खरीद लेते हैं और हरि का खूब धनदा होता है और हरी उस बकरी का शुक्रगुजार रहता है।



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